Monday, 22 March 2021

शहीद दिवस पर क्रांतिकारी भगत सिंह का विनम्र अभिवादन

शहीदों की चिताओं पर लगेंगे हर बरस मेले

वतन पर मिटने वालों का यही बाकी निशां होगा....


Sunday, 14 March 2021

तेल देखिए, और तेल की धार देखिए

 








तेल देखिए, और तेल की धार देखिए......

हरदम प्राइस-वार देखिए, ओपेक की हुंकार देखिए,

तरह-तरह की कार देखिए, अद्भुत नाटककार देखिए,

दिल्ली की सरकार देखिए, महंगाई की मार देखिए.....

तेल देखिए, और तेल की धार देखिए।


चोट्टों का व्यापार देखिए, झोलीफाड़ गुहार देखिए,

मालदार अय्यार देखिए, चोरों की भरमार देखिए,

डालर की झंकार देखिए, रुपया दांत-चियार देखिए,

तेल देखिए, और तेल की धार देखिए।


गाड़ी धक्कामार देखिए, मचता हाहाकार देखिए,

दौलत के अंबार देखिए, जालिम जोड़ीदार देखिए,

भीतर-भीतर प्यार देखिए, बाहर से तकरार देखिए.....

तेल देखिए, और तेल की धार देखिए।


पंडों के त्योहार देखिए, पब्लिक अपरंपार देखिए,

मुफलिस की दरकार देखिए, लोकतंत्र लाचार देखिए,

कानूनी हथियार देखिए, संविधान बेकार देखिए.....

तेल देखिए, और तेल की धार देखिए।


गद्दी पर पर दुमदार देखिए, वोटर पर उपकार देखिए,

सबके सिर तलवार देखिए, बिना नाव पतवार देखिए,

फांके से बीमार देखिए, फांसी पर दो-चार देखिए, .....

तेल देखिए, और तेल की धार देखिए।


संकट के आसार देखिए, लोग फंसे मझधार देखिए,

उजड़े घर-परिवार देखिए, धनिया की चिग्घार देखिए,

गोबर की अंकवार देखिए, किसान की ललकार देखिए,

तेल देखिए, और तेल की धार देखिए।


कुर्सी-कुर्सी स्यार देखिए, खादी में अवतार देखिए,

लुच्चों के त्योहार देखिए, गुंडों के सरदार देखिए,

खूब मचाये रार देखिए, फिर जूतम-पैजार देखिए,

तेल देखिए, और तेल की धार देखिए।


विश्वबैंक बटमार देखिए, जुड़े तार-बे-तार देखिए,

दोनो हाथ उधार देखिए, अमरीकी दुत्कार देखिए,

डाकू के भंडार देखिए, होते बंटाढार देखिए,

तेल देखिए, और तेल की धार देखिए।


अय्याशी उस पार देखिए, फिल्मी पॉकेटमार देखिए,

पर्दे पर पुचकार देखिए, गंदे गीत-मल्हार देखिए,

खुले नर्क के द्वार देखिए, एक नहीं सौ बार देखिए, 

तेल देखिए, और तेल की धार देखिए........


किसान मार्च :: चलो दिल्ली, चलो दिल्ली..


उठो फिर से किसानों के तिरंगे की कसम खाओ,

उठो, फिर से जवानों के तिरंगे की कसम खाओ,

उठो उत्तर से, पश्चिम-पूर्व से कन्याकुमारी तक -

चलो दिल्ली, चलो दिल्ली.... चलो दिल्ली, चलो दिल्ली....



जगाती है किसानों को हमारे कर्म की धरती, 

जगाती है जवानों को हमारे धर्म की धरती,

वतन की हर गली, हर गांव से उट्ठेगा अब रेला,

शहीदों की चिताओं पर लगेगा हर तरफ मेला,

उठो, जागो हमे फिर से भगत सिंह ने पुकारा है -  

चलो दिल्ली, चलो दिल्ली.... चलो दिल्ली, चलो दिल्ली....


बड़ी हिम्मत से जो दुश्मन का सीना चीर जागे हैं,

हमारी सरहदों पर खड़े लाखों वीर जागे हैं,

हमारा खेत जागा है, हमारा गांव जागा है,

फसल के लिए मिट्टी में सना हर पांव जागा है,

उठो, जागो हमे अब अन्नदाता ने पुकारा है -  

चलो दिल्ली, चलो दिल्ली.... चलो दिल्ली, चलो दिल्ली....


उठो, अब लूट लो, इन लूटने वालो की आजादी,

उठो, अब छीन लो पैसे के मतवालों की आजादी,

किसानों का, मजूरों का ये मुफ़लिस्तान बदलेगा,

उठो, जागो, हमारा सारा हिंदुस्तान बदलेगा,

उठो हर कौम से, जागो ये जन-गण-मन हमारा है - 

चलो दिल्ली, चलो दिल्ली.... चलो दिल्ली, चलो दिल्ली....


सुबह सुबह का फ़र्क

  खाए-अघाए लोगों की सुबह- मोटिवेशन क चरा बीनते बच्चों की सुबह- दाना-पानी