उठो फिर से किसानों के तिरंगे की कसम खाओ,
उठो, फिर से जवानों के तिरंगे की कसम खाओ,
उठो उत्तर से, पश्चिम-पूर्व से कन्याकुमारी तक -
चलो दिल्ली, चलो दिल्ली.... चलो दिल्ली, चलो दिल्ली....
जगाती है किसानों को हमारे कर्म की धरती,
जगाती है जवानों को हमारे धर्म की धरती,
वतन की हर गली, हर गांव से उट्ठेगा अब रेला,
शहीदों की चिताओं पर लगेगा हर तरफ मेला,
उठो, जागो हमे फिर से भगत सिंह ने पुकारा है -
चलो दिल्ली, चलो दिल्ली.... चलो दिल्ली, चलो दिल्ली....
बड़ी हिम्मत से जो दुश्मन का सीना चीर जागे हैं,
हमारी सरहदों पर खड़े लाखों वीर जागे हैं,
हमारा खेत जागा है, हमारा गांव जागा है,
फसल के लिए मिट्टी में सना हर पांव जागा है,
उठो, जागो हमे अब अन्नदाता ने पुकारा है -
चलो दिल्ली, चलो दिल्ली.... चलो दिल्ली, चलो दिल्ली....
उठो, अब लूट लो, इन लूटने वालो की आजादी,
उठो, अब छीन लो पैसे के मतवालों की आजादी,
किसानों का, मजूरों का ये मुफ़लिस्तान बदलेगा,
उठो, जागो, हमारा सारा हिंदुस्तान बदलेगा,
उठो हर कौम से, जागो ये जन-गण-मन हमारा है -
चलो दिल्ली, चलो दिल्ली.... चलो दिल्ली, चलो दिल्ली....

So nice
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